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किसी भी नंबर से आ सकता है मुझे तुम्हारा फोन — केतन यादव की कविताएँ
तभी मेरे भ्रम ने मुझसे कहा
अब दुनिया के सभी नंबर तुम्हारे ही हैं
किसी भी नंबर से आ सकता है मुझे तुम्हारा फोन।


वन्ध्या प्रार्थनाओं और लौटती स्मृतियों के बीच – दीप्ति कुशवाह की कविताएँ
मैं लौटती हूँ
न घर, न देहरी, न दीवार
बस एक पुरानी बाँस की खटिया
जहाँ समय ने रस्सियों को झुकाकर
लौटने और न लौट पाने का अंतर लिखा है।


मेरे संसार के दायरों तक जल आ पहुँचा है : अजय नेगी की कविताएँ
मेरे संसार के दायरों तक जल आ पहुँचा है
सबकुछ अब धुँधला जाने की कगार पर है
इन्हीं क्षणों में मुझे भी कुछ करना है
मैं मनुष्य हूँ सो आँखें बंद कर रहा हूँ।


जीवन एक अभ्यास था — अभिनव श्रीवास्तव की कविताएँ
इच्छा मैं चाहता हूँ आज सबसे पहले भंग हो मेरा संभ्रान्त होना मुझे छू जाए कोई मैली-कुचैली देह कोई मुझे भी दे जाए धक्का और मैं भी पीड़ा में...
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